Acharya Prashant
February 12, 2025 at 10:59 AM
संत रविदास जयंती पर
आचार्य प्रशांत का
इंडिया न्यूज़ पर विशेष लेख
"संत रविदास जयंती: उच्चता और विनम्रता"
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"जब संत रविदास यह कहते हैं कि वे तथाकथित छोटी जाति में जन्मे हैं, तो वे वास्तव में अपनी जाति की बात नहीं कर रहे होते। संत किसी भी जाति और वर्ग की सीमाओं से परे होते हैं। वे जन्म से मिले शरीर को अपनी सच्चाई नहीं मानते। जब वे जन्म को तुच्छ कहते हैं, तो वे समस्त मानवजाति की शारीरिक स्थिति का वर्णन कर रहे होते हैं। वे यह कह रहे हैं कि केवल वही व्यक्ति, जो शरीर की पुरानी आदतों में फंसे रहने की प्रवृत्ति को स्पष्ट रूप से देख पाता है, उससे मुक्त हो सकता है। जो अपने ज्ञान पर अभिमान करता है, जो अपनी बुद्धिमत्ता से भरा हुआ है, वह सत्य की ओर बढ़ ही नहीं सकता। वहीं, जो विनम्र है, जो सबसे निचले स्थान पर बैठने को तैयार है, जो कतार में सबसे अंत में खड़े होने को तैयार है, वही वहाँ तक पहुँच सकता है।"
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इंडिया न्यूज़ पर पूरा लेख पढ़ें: https://indianews.in/dharam/sant-ravidas-jayanti-special-acharya-prashant-take-on-highness-and-humility-difference-between-common-man-and-saints/
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