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February 13, 2025 at 10:02 AM
*भगवान से प्रार्थना में क्या मांगूँ…???🙏🏻🙏🏻* प्रह्लाद ने भगवान से माँगा:- *"हे प्रभु मैं यह माँगता हूँ कि मेरी माँगने की इच्छा ही ख़त्म हो जाए…"* कुंती ने भगवान से माँगा:- *"हे प्रभु मुझे बार बार विपत्ति दो ताकि आपका स्मरण होता रहे…"* महाराज पृथु ने भगवान से माँगा:- *"हे प्रभु मुझे दस हज़ार कान दीजिये ताकि में आपकी पावन लीला गुणानुवाद का अधिक से अधिक रसास्वादन कर सकूँ…"* और हनुमान जी तो बड़ा ही सुंदर कहते हैं:- *"अब प्रभु कृपा करो एही भाँती।सब तजि भजन करौं दिन राती॥"* *भगवान से माँगना दोष नहीं मगर क्या माँगना ये होश जरूर रहे…* *पुराने समय में भारत में एक आदर्श गुरुकुल हुआ करता था, उसमें बहुत सारे छात्र शिक्षण कार्य किया करते थे, उसी गुरुकुल में एक विशेष जगह हुआ करती थी जहाँ पर सभी शिष्य प्रार्थना किया करते थे, वह जगह पूजनीय हुआ करती थी…* *एक दिन एक शिष्य के मन के जिज्ञासा उत्पन हुई तो उस शिष्य ने गुरु जी से पूछा - हम प्रार्थना करते हैं, तो होंठ हिलते हैं पर आपके होंठ कभी नहीं हिलते…* *आप पत्थर की मूर्ति की तरह खडे़ हो जाते हैं, आप कहते क्या हैं अन्दर से…क्योंकि अगर आप अन्दर से भी कुछ कहेंगे तो होठों पर थोड़ा कंपन तो आ ही जाता है, चेहरे पर बोलने का भाव आ ही जाता है, लेकिन आपके कोई भाव ही नहीं आता…* *गुरु जी ने कहा - मैं एक बार राजधानी से गुजरा और राजमहल के सामने द्वार पर मैंने सम्राट और एक भिखारी को खडे़ देखा…* *वह भिखारी बस खड़ा था, फटे--चीथडे़ थे उसके शरीर पर, जीर्ण - जर्जर देह थी जैसे बहुत दिनो से भोजन न मिला हो, शरीर सूख कर कांटा हो गया…* *बस आंखें ही दीयों की तरह जगमगा रही थीं,बाकी जीवन जैसे सब तरफ से विलीन हो गया हो,वह कैसे खड़ा था यह भी आश्चर्य था...* *लगता था अब गिरा-तब गिरा !* *सम्राट उससे बोला - बोलो क्या चाहते हो…???* *उस भिखारी ने कहा - अगर आपके द्वार पर खडे़ होने से मेरी मांग का पता नहीं चलता,तो कहने की कोई जरूरत नहीं… क्या कहना है, मै आपके द्वार पर खड़ा हूं,मुझे देख लो मेरा होना ही मेरी प्रार्थना है…"* *गुरु जी ने कहा - उसी दिन से मैंने प्रार्थना बंद कर दी,मैं परमात्मा के द्वार पर खड़ा हूं,वह देख लेगें…* *अगर मेरी स्थिति कुछ नहीं कह सकती,तो मेरे शब्द क्या कह सकेंगे…* *अगर वह मेरी स्थिति नहीं समझ सकते,तो मेरे शब्दों को क्या समझेंगे...???* *अतः भाव व दृढ विश्वास ही सच्ची परमात्मा की याद के लक्षण हैं,यहाँ कुछ मांगना शेष नही रहता,आपका प्रार्थना में होना ही पर्याप्त है..!!* 🙏🙏🙏👏👏👏
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