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February 2, 2025 at 02:21 AM
मोदी सरकार का ये बजट सामाजिक न्याय विरोधी, आर्थिक समानता विरोधी होने के साथ ही समावेशी विकास के मामले में एक बड़ी निराशा लेकर आया है। दलितों, आदिवासियों, पिछड़े वर्गों, मुस्लिम व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों, महिलाओं, गरीबों, मजदूरों और किसानों के लिए आवंटित राशि में मामूली वृद्धि हुई है, जबकि मुद्रास्फीति दर 6% से अधिक है। यानि कि देश की बहुसंख्यक वंचित तबके की आबादी के लिए आमदनी अठन्नी खर्चा 100 रुपया से ज्यादा और इस बजट में कुछ नहीं है। आंकड़ों के हिसाब से देखें तो वास्तविक मूल्य में इन समुदायों के लिए आवंटन कम हुआ हैं। यह बजट इन समुदायों के विकास और सशक्तिकरण की दिशा में भी निराशाजनक ही है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आवंटन में मामूली वृद्धि ने इन समुदायों की समस्याओं को हल करने के बजाय उन्हें और गहरा दिया है। विशेषकर, ग्रामीण और शहरी गरीबों, महिलाओं और किसानों के लिए योजनाओं का अपर्याप्त बजट उनकी आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर सकता है। कुल मिलाकर चंद ‘मित्र’ उद्योगपतियों को बांटी गई रेवड़ियों के बीच सरकार द्वारा प्रस्तुत किए गए बजट में दलितों के हाथ खाली, आदिवासियों के हाथ खाली, पिछड़ों के हाथ खाली, मुस्लिम समाज व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यको के हाथ खाली ही हैं। वहीं किसानों, मजदूरों और युवाओं को झुनझुना थमाया गया है। #budget2025
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