Arpit sir Reasoning
January 25, 2025 at 09:50 AM
*तैयारी कर रहे एक बच्चे से बात हुई तो उसने कहा कि जब कुछ कर ही नही पा रहें हैं तो सब छोड़ देना चाहिए. अभी तक बहुत बार ऐसा ख्याल आया है कि छोड़ दूं लेकिन फिर सोचता हूं कि पापा को कैसे कहूंगा? क्या जवाब दूंगा उनको?* *सबसे पहले तो बहुत हिम्मत चाहिए ऐसे विचारों को टालने के लिए, और अगर अब तक आप कर पाए हैं तो उसके लिए आपको बहुत बधाई. और पहला सुझाव मेरा यही है कि आपको ये टालने का काम हर बार करते रहना है.* *क्यों करना है इस बात को भी अच्छे से समझ लेते हैं. कोई प्रवचन नही है बल्कि जीवन की वास्तविकता लिखूंगा और मुझे उम्मीद है कि आपको समझ में भी आएगा और आप खुद भी सहमत होंगे.* *कई बार ऐसा समय आता है जब परिस्थितियां, लोग, परिवार, विचार और हम खुद भी अपने और अपने जीवन के विरुद्ध खड़े हो जाते हैं. सब कुछ बहुत उलझा हुआ सा लगता है. बहुत कोशिश करते हैं लेकिन हर बार वैसा नही होता जैसा हम चाहते हैं. अपनी ऊर्जा का स्तर नीचे गिरता हुआ पाते हैं और धीरे धीरे ऐसे विचार, परिस्थितियां, और बातें हम पर हावी होती चली जाती हैं.* *बात ऐसी है कि इस वक्त थोड़ा आराम लेना चाहिए, जो चोटें, जो असफलताएं हमने अपने व्यक्तित्व, आत्मविश्वास और उम्मीदों पर खाई होती हैं उनको थोड़ा समय मिले और वो ठीक हो सकें. जब हम कठिन समय में उलझे हुए होते हैं तो विराम लेकर सोचने की जगह और अधिक प्रयास करने लगते हैं और क्योंकि वो प्रयास पूरे मन से नही दिया होता है इसलिए एक भी प्रयास में शत प्रतिशत नही दे पाते हैं और लगातार हार का सामना करना पड़ता है जिससे आत्मविश्वास भी गिरने लगता है और लोगों की बातों और नकारात्मक विचारों पर विश्वास बढ़ने लगता है.* *हमें करना ये चाहिए कि थोड़ा विराम लेकर, खुद में सुधार और विस्तार कर, खुद को एकाग्र कर, खुद की कीमत खुद की नजरों में दोबारा बढ़ाने पर जोर देना चाहिए. आत्मविश्वास ऊंचा करने के लिए सकारात्मकता के घूंट अच्छी किताबें, बातों, आदतों और ज्ञान के जरिए प्राप्त कर सकते हैं. और आप देख पाएंगे कि जो धुंध दिमाग पर छा रही थी वो धीरे धीरे कम होने लगती है और और दोबारा जीवन पर नियंत्रण होने लगता है. इसलिए बात बिगड़ने से पहले समय समय पर विश्राम लेना आवश्यक होता है जिससे आप खुद के मन में चल रहे नकारात्मक विचारों को किनारे कर सकें.*
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