Jatin Tyagi
February 4, 2025 at 08:00 AM
पुण्यातिरम्या त्रिदशै: सुपूजिता: धन्या निखिलैमंहषिभि:।
भूतेशकन्या जयतादनारतं, नान्या वरेण्या मम देवि नर्मदे।।
अर्थात- समस्त मुनि व ऋषियों की माता, देवताओं से सुपूजित, पुण्यशीला अत्यंत रमणीय, महेश्वर की कन्या नर्मदा धन्य है। सदा ही तुम्हारी जय हो। हे देवि नर्मदे! मुझे तो तुम्हीं एक पूजनीय प्रतीत होती हों।
माँ नर्मदा प्रकटोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ 👏🚩