GitaVerZ
February 16, 2025 at 01:37 AM
🌟 *📜 श्रीमद्भगवद्गीता: अध्याय 3, श्लोक 20-21 📜** 🌟
🕉️ **श्लोक:**
➤ **कर्मणैव हि संसिद्धिमास्थिता जनकादयः।**
**लोकसंग्रहमेवापि सम्पश्यन्कर्तुमर्हसि॥** (BG 3.20)
➤ **यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः।**
**स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते॥** (BG 3.21)
📖 **🔍 शब्दार्थ (Word Meaning):**
🔹 **कर्मणा (Karmṇā)** - निर्धारित कर्त्तव्यों का पालन करना
🔹 **एव (Eva)** - केवल
🔹 **हि (Hi)** - निश्चय ही
🔹 **संसिद्धिम् (Saṁsiddhim)** - पूर्णता
🔹 **आस्थिताः (Āsthitāḥ)** - प्राप्त करना
🔹 **जनक-आदयः (Janakādayaḥ)** - राजा जनक तथा अन्य राजा
🔹 **लोक-संग्रहम् (Loka-Saṁgraham)** - सामान्य लोगों के कल्याण के लिए
🔹 **एव अपि (Eva Api)** - केवल
🔹 **सम्पश्यत् (Sampaśyat)** - विचार करते हुए
🔹 **कर्तुम् (Kartum)** - निष्पादन करना
🔹 **अर्हसि (Arhasi)** - तुम्हें चाहिए
🔹 **यत्-यत् (Yat-Yat)** - जो-जो
🔹 **आचरति (Ācarati)** - करता है
🔹 **श्रेष्ठः (Śreṣṭhaḥ)** - उत्तम, आदर्श व्यक्ति
🔹 **तत् (Tat)** - वही
🔹 **तत्-केवल (Tat-Kevala)** - केवल वही
🔹 **एव (Eva)** - निश्चय ही
🔹 **इतरः (Itaraḥ)** - सामान्य
🔹 **जनः (Janaḥ)** - व्यक्ति
🔹 **सः (Saḥ)** - वह
🔹 **यत् (Yat)** - जो कुछ
🔹 **प्रमाणम् (Pramāṇam)** - आदर्श
🔹 **कुरुते (Kurute)** - करता है
🔹 **लोकः (Lokaḥ)** - संसार
🔹 **तत् (Tat)** - उसके
🔹 **अनुवर्तते (Anuvartate)** - अनुसरण करता है
📜 *🕉️ श्लोक का अर्थ (Translation):**
👉 **राजा जनक** और अन्य महापुरुषों ने अपने *नियत कर्मों* का पालन कर **सिद्धि** प्राप्त की थी।
👉 इसलिए तुम्हें भी **कर्तव्यों** का पालन करते हुए *समाज के कल्याण* हेतु **आदर्श प्रस्तुत** करना चाहिए।
👉 **महापुरुष** जो भी **कर्म** करते हैं, सामान्य जन उसी का **अनुसरण** करते हैं।
👉 वे जो भी **आदर्श** स्थापित करते हैं, सारा संसार उन्हीं का **अनुकरण** करता है।
💡 *🌟 श्लोक की व्याख्या: कर्म योग - सिद्धि का साधन**
🔹 *"ज्ञान" एक क्षण में प्राप्त हो सकता है, परंतु कर्म के द्वारा स्वयं को तैयार करना आवश्यक होता है।**
🔹 राजा **जनक** जैसे महापुरुषों ने *असंग भाव* से **कर्मयोग** अपनाकर समाज सेवा की और पूर्णता प्राप्त की।
🔹 **"लोकसंग्रह" का अर्थ है – समाज के कल्याण हेतु कार्य करना।**
🔹 एक **सच्चा कर्मयोगी** अपने *कर्तव्यों* का पालन करते हुए समाज के लिए **आदर्श प्रस्तुत** करता है।
🌟 *🔥 आदर्श व्यक्ति का प्रभाव🔥**
✅ *श्रेस्ठ व्यक्ति* की हर क्रिया को समाज *अनुसरण* करता है।
✅ *अर्जुन!* तुम एक *योद्धा* हो, यदि तुम *संन्यास* ले लोगे, तो लोग युद्ध से *भागना* सीखेंगे!
✅ *बड़े लोगों* का हर कार्य समाज को **प्रेरणा** देता है, ठीक वैसे ही जैसे:
- **महानायक अमिताभ बच्चन**, क्रिकेटर **सचिन तेंदुलकर** जैसे लोग **आदर्श** बनते हैं।
- एक पिता जब शीशे में बाल संवारता है, तो **बच्चा** भी उसे देखकर *नकल* करता है।
- जब **ज़िनेदिन जिदान** ने फुटबॉल वर्ल्ड कप में *हेड बट* किया, तो युवा **उसकी नकल** करने लगे!
🌍 *📢 लोकसंग्रह का महत्व**
🔹 *राजनीति, खेल, सिनेमा* – हर क्षेत्र में *आदर्श व्यक्ति* होते हैं, जिनके पीछे पूरा समाज चलता है।
🔹 तमिलनाडु में *फिल्म स्टार्स* राजनीति में आए और **मुख्यमंत्री** बने, क्योंकि जनता *अंधभक्ति* करती है।
🔹 *महापुरुषों* की शक्ति केवल **ज्ञान** में नहीं, बल्कि **उनके कर्मों** में होती है।
🟢 *यदि अर्जुन जैसे महापुरुष* कर्मयोगी बनें, तो हजारों लोग **धर्म और कर्म** को अपनाएँगे!
🟢 *हर व्यक्ति* अपने *क्षेत्र में* किसी न किसी के लिए **आदर्श** होता है, इसलिए **सही मार्ग** पर चलें।
🟢 **सच्चा कर्मयोगी** अपने कर्तव्यों का पालन कर संसार को सही दिशा दिखाता है!
✨ *🙏 जय श्रीकृष्ण! 🙏**
📢 *📨 यह ज्ञान सभी को भेजें और गीता की महानता को फैलाएं!*
🙏
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