GitaVerZ
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February 20, 2025 at 12:36 AM
🕉️ **श्रीमद्भगवद्गीता: अध्याय 3, श्लोक 25** 🕉️ 📖 **सक्ताः कर्मण्यविद्वांसो यथा कुर्वन्ति भारत।** **कुर्याद्विद्वांस्तथासक्तश्चिकीर्षुर्लोकसंग्रहम् ॥** 🧐 **शब्दार्थ:** 🔹 **सक्ताः** - आसक्त 🔹 **कर्मणि** - नियत कर्तव्य 🔹 **अविद्वांसः** - अज्ञानी 🔹 **कुर्वन्ति** - करते हैं 🔹 **विद्वान** - बुद्धिमान 🔹 **असक्तः** - अनासक्त 🔹 **चिकीर्षुः** - इच्छुक 🔹 **लोकसंग्रहम्** - लोक कल्याण के लिए 🎯 **भावार्थ:** 👉 **हे अर्जुन!** जैसे **अज्ञानी लोग** फल की आसक्ति के साथ कर्म करते हैं, वैसे ही **ज्ञानी पुरुष** भी, लेकिन **अनासक्त** होकर कर्म करें ताकि अन्य लोग भी **सही मार्ग** पर चल सकें। ✨ *📌 यह श्लोक हमें क्या सिखाता है?** ✨ 1️⃣ *📌 साधारण व्यक्ति का दृष्टिकोण:** - अधिक **धन-संपत्ति** कमाने के लिए दिन-रात मेहनत करता है। - **आसक्ति** (attachment) के कारण ही वह कड़ी मेहनत करता है। - उसका **लक्ष्य** केवल **सांसारिक सुखों** को पाना होता है। 2️⃣ *📌 ज्ञानी व्यक्ति का दृष्टिकोण:** - वह भी उतनी ही **कड़ी मेहनत** करता है लेकिन **निष्काम भाव** से। - कर्म करते समय उसे **फल की इच्छा नहीं होती**। - वह यह सब **ईश्वर की सेवा** में करता है, न कि निजी लाभ के लिए। 💡 *🚀 दोनों के कर्म समान लग सकते हैं, लेकिन मानसिकता बिल्कुल अलग होती है!** 🔥 *🔑 अर्जुन के लिए श्रीकृष्ण की प्रेरणा:** 🔥 ➡️ **भगवान श्रीकृष्ण** अर्जुन को प्रेरित कर रहे हैं कि **कर्म करो, पर आसक्ति मत रखो।** ➡️ **स्वार्थ** को छोड़कर कर्म करने से **समाज का भी कल्याण होता है**। ➡️ यह **कर्मयोग** का वास्तविक **संदेश** है - *"कर्म करो, फल की चिंता मत करो!"* 🌟 *📢 आज से क्या सीख सकते हैं?* 🌟 ✅ **हर व्यक्ति अपने कर्म करता है**, लेकिन हम तय कर सकते हैं कि हम **स्वार्थी** बनेंगे या **सेवाभाव से कर्म करेंगे**। ✅ **स्वार्थ रहित कर्म** से ही हम **सच्ची सफलता और संतोष** पा सकते हैं। ✅ **बुद्धिमान व्यक्ति को समाज को सही दिशा दिखानी चाहिए, ताकि बाकी लोग भी प्रेरित हो सकें।** 💬 *✨ "क्या आप अपने कर्मों में निष्काम भाव ला सकते हैं?"* 📢 *🌍 यह संदेश अपने प्रियजनों तक पहुँचाएं और गीता ज्ञान फैलाएं!* 🕉️🚩
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