GitaVerZ
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February 28, 2025 at 12:41 AM
🌿 *🕉️ श्रीमद्भगवद्गीता: अध्याय 3, श्लोक 34 🕉️* 🌿 *इन्द्रियस्येन्द्रियस्यार्थे रागद्वेषौ व्यवस्थितौ।** *तयोर्न वशमागच्छेत्तौ ह्यस्य परिपन्थिनौ ॥34॥** 🔹 **शब्दार्थ:** 📌 **इन्द्रियस्य** - इन्द्रिय का 📌 **इन्द्रियस्य-अर्थे** - इन्द्रियों के विषयों में 📌 **राग** - आसक्ति (अत्यधिक लगाव) 📌 **द्वेषौ** - विमुखता (अत्यधिक घृणा) 📌 **व्यस्थितौ** - स्थित 📌 **तयोः** - उनके 📌 **न** - कभी नहीं 📌 **वशम्** - नियंत्रण में आना 📌 **आगच्छेत्** - आना चाहिए 📌 **तौ** - उन्हें 📌 **हि** - निश्चय ही 📌 **अस्य** - उसके लिए 📌 **परिपन्थिनौ** - शत्रु 🎯 *🔸अनुवाद:** 👉 **इन्द्रियों का इन्द्रिय-विषयों के साथ स्वाभाविक रूप से राग (आसक्ति) और द्वेष (विमुखता) होता है, किन्तु मनुष्य को इनके वशीभूत नहीं होना चाहिए, क्योंकि ये आत्म-कल्याण के मार्ग में अवरोध और शत्रु हैं।** 🧘 *📖 विस्तृत व्याख्या:** 💡 *🌟 "मनुष्य को क्या नियंत्रित करता है?"** हमारी **इन्द्रियाँ** हमें **आसक्ति (राग) और घृणा (द्वेष)** की ओर खींचती हैं। अगर हम अपने मन और इन्द्रियों को नियंत्रित नहीं कर पाते, तो हम **अपनी स्वयं की स्वतंत्रता खो देते हैं** और **भावनाओं के दास बन जाते हैं**। **लेकिन घबराने की जरूरत नहीं! श्रीकृष्ण हमें समाधान भी देते हैं।** 🔹 **राग और द्वेष के जाल से बचने का उपाय क्या है?** ⚡ *समाधान है - "सजगता" और "स्वयं का निरीक्षण"।* 🔹 **राग-द्वेष की समस्या:** 🛑 "राग और द्वेष" **हमारी स्वतंत्रता छीन लेते हैं** और हमें भ्रम में डाल देते हैं। 🚫 हमें वही चीजें पसंद आती हैं जो हमारी इच्छाओं के अनुकूल होती हैं, और हम उनसे घृणा करते हैं जो हमारी इच्छाओं को बाधित करती हैं। 💠 *💭 क्या कभी सोचा है?** ❓ क्या हम किसी चीज़ को इसलिए चाहते हैं क्योंकि वह हमारे लिए सही है, या सिर्फ इसलिए कि हमें वो पसंद है? ❓ क्या हम किसी चीज़ से बचते हैं क्योंकि वो गलत है, या सिर्फ इसलिए कि हमें वो पसंद नहीं? 👉 जब हम अपनी इच्छाओं का विश्लेषण नहीं करते, तो हम **इन्द्रियों के दास** बन जाते हैं! 🎯 **राग-द्वेष से कैसे बचें?** 🛡️ **1️⃣ अपने मन पर पहरा दें!** 📍 "क्या मैं इस चीज़ को सिर्फ इसलिए कर रहा हूँ क्योंकि मुझे पसंद है?" 📍 "क्या मैं इस चीज़ से सिर्फ इसलिए बच रहा हूँ क्योंकि मुझे नफरत है?" अगर जवाब "हाँ" है, तो **आप राग-द्वेष के चक्र में फँस रहे हैं!** 🔍 **2️⃣ राग-द्वेष के प्रभाव कहाँ-कहाँ हैं?** 👉 **खान-पान** - हम वही खाते हैं जो हमें पसंद आता है, भले ही वह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो! 👉 **मनोरंजन** - हम वही टीवी शो देखते हैं, वही किताबें पढ़ते हैं, जो हमारे राग में आते हैं। 👉 **रिश्ते** - हम उन्हीं लोगों से बात करते हैं, जो हमारी सोच से मेल खाते हैं। 👉 **विचारधारा** - हम केवल उन्हीं बातों को मानते हैं जो हमें अच्छी लगती हैं, बाकी को नकार देते हैं! 🚦 **3️⃣ इन "चोरों" को पहचानें!** राग-द्वेष **आपके मन को लूटते हैं**, लेकिन यह **छुपे हुए चोर** होते हैं! 😈 वे **मिठास भरी बातों** से आते हैं, आपको अपनी गिरफ्त में ले लेते हैं, और धीरे-धीरे **आपका स्वामी** बन जाते हैं। 💡 *🎯 तो उपाय क्या है?** 👉 **संतुलन साधना सीखें!** ⚖️ *"जो सही है, वही करो!"** 💠 कोई चीज़ अच्छी लगे या बुरी - यह मायने नहीं रखता। 💠 **महत्वपूर्ण यह है कि वह सही है या नहीं?** 🌿 *🔱 श्रीकृष्ण का संदेश:** 🛑 "राग-द्वेष तुम्हारे सबसे बड़े शत्रु हैं। इनका दास मत बनो। अपनी इच्छाओं के दास मत बनो। अपनी बुद्धि से अपने कर्मों को तय करो!" 🌟 *🙏 हर क्षण अपने विचारों को जांचें - क्या मैं सही सोच रहा हूँ? क्या मैं सही निर्णय ले रहा हूँ?** 🌟 📩 *❇️ इस ज्ञान को अपने जीवन में लागू करें और गीता के गूढ़ रहस्य को समझने के लिए ‘GitaVerZ’ से जुड़े रहें! 🙌🚀**
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