जाने जैन इतिहास को ✨
March 1, 2025 at 04:02 AM
*01 मार्च*
*कब क्या हुआ!*
- जाने तेरापंथ के इतिहास को
तेरापंथ द्विशताब्दी के अवसर पर राजनगर में संतों के लिए सध्वियों से पानी मंगवाना बंद कर दिया गया।
साध्वियों द्वारा पानी की व्यवस्था
प्राचीन समय में पानी की कमी थी। अतः जितना पानी मिलता वह समुच्चय में रखा जाता। प्रति व्यक्ति के हिसाब से पानी माप कर लिया जाता। प्रातः पंचमी समिति के लिए संत पानी नहीं लाते थे। साध्वियां अपनी बारी के क्रम से प्रातः सन्तों के स्थान पर पानी लाती थीं। उसे कलसिए (माप का साधन) से माप कर साधुओं को वितरित किया जाता था।
आचार्यश्री का सन् 1949 (वि. सं. 2006) का चातुर्मास जयपुर था। शहरी प्रवास और स्थान की दूरी को ध्यान में रखते हुए साध्वियों द्वारा पानी मंगाना बंद कर दिया गया। चातुर्मास के बाद पुनः पूर्व व्यवस्था प्रभावी बन गई। उसके बाद भावी यात्राओं का दौर चला। वहां भी यही व्यवस्था रही कि जहां दूरी होती, वहां साधु स्वयं पानी लाते अन्यथा साध्वियां पानी ले जातीं।
9 अक्टूबर 1960 (वि. सं. 2017 कार्तिक कृष्णा पंचमी) द्विशताब्दी के अवसर पर राजनगर में साध्वियों से पानी मंगाना बन्द कर दिया। यह निर्देश दिया कि साधु अपने-अपने वर्ग की अपेक्षा के अनुसार अपनी-अपनी गोचरी से पानी लाए। किसी की गोचरी में पानी उपलब्ध न हो तो दूसरी गोचरी वालों से पूछकर लाया जाए। आज भी यही व्यवस्था प्रभावी है।
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*समण संस्कृति संकाय*
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