Ai Imaan Walon Allah Se Daro 😔
June 2, 2025 at 03:18 AM
*मसअला == दावत में जाना उस वक़्त सुन्नत है जब मालूम हो कि वहाँ गाना बजाना लह्व व लइब नहीं है और अगर मालूम है कि ये खुराफ़ात वहाँ है तो न जाये*
*जाने के बाद मालूम हुआ कि यहाँ लग्वयात हैं अगर वहाँ ये चीज़ें हों तो वापस आये और अगर मकान के दूसरे हिस्से में हैं जिस जगह खाना खिलाया जाता है वहाँ नहीं हैं तो वहाँ बैठ सकता है और खा सकता है। फिर अगर ये शख़्स उन लोगों को रोक सकता है तो रोक दे और अगर उसकी क़ुदरत उसे न हो तो सब्र करे*
*यह उस सूरत में है कि यह शख़्स मज़हबी पेशवा न हो और अगर मुक़तदा व पेशवा हो मसलन उलमा व मशाइख़, ये अगर न रोक सकते हों तो वहाँ से चले आयें*
*न वहाँ बैठें और न खाना खायें और पहले ही से ये मालूम हो कि वहाँ ये चीज़ें हैं तो मुक़तदा हो या न हो किसी को जाना जायज़ नहीं अगरचे ख़ास उस हिस्से मकान में ये चीज़ें न हों बल्कि दूसरे हिस्से में हों*
*(हिदाया, दुर्रे मुख़्तार)*
*(📚 इस्लामी अख़लाक़ व आदाब पेज 50)*
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