Amit Jain
June 5, 2025 at 04:06 PM
_पहचान रोग हो जाए तो उस का भूलना बेहतर,_
_रिश्ता बोझ बन जाए तो उस को तोड़ना अच्छा।_
_वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन,_
_उसे इक ख़ूबसूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा।_
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