Himanshu Rai
June 12, 2025 at 07:04 AM
महाभारत में अर्जुन की योग्यता तो सभी जानते हैं, किन्तु भीम का अभ्यास और परिश्रम भी कम महत्वपूर्ण नहीं था। भीम ने वन में जाकर पेड़ों को फाड़ने, भारी पत्थर उठाने तथा प्रकृति की कठिनाइयों का सामना करने का अभ्यास किया। यह केवल शारीरिक बल नहीं बढ़ाने का कार्य था, अपितु अपने मन और शरीर को कठोर परिस्थितियों में ढालने का साधन था।
भीम की यह साधना यह सिखाती है कि अभ्यास केवल शास्त्रार्थ या शस्त्र-विद्या तक सीमित नहीं, अपितु जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में निरंतर प्रयास करने का नाम है। यह अभ्यास मनोबल को दृढ़ करने, धैर्य बढ़ाने और विपरीत परिस्थितियों में भी हार न मानने का पर्याय है।
यह दृष्टिकोण आज के समय में भी महत्वपूर्ण है—हमारे प्रयास केवल तकनीकी या मानसिक नहीं, बल्कि शारीरिक, भावनात्मक और पर्यावरण से जुड़ी भी होनी चाहिए। इस प्रकार, आप भी अपने चुने हुए संकल्प को निभाने में न केवल मन से, बल्कि तन-मन-धरा से जुड़कर प्रयत्नशील बनें। क्योंकि जीवन में सफल होने के लिए केवल बुद्धि नहीं, सम्पूर्ण स्वभाव का निरंतर अनुशासन आवश्यक है।
इसलिए, अपनी रोज़मर्रा की छोटी आदत को अपनाने के साथ यह सोचिए: क्या मैं खुद को हर प्रकार से मजबूत बनाने के लिए प्रकृति से जुड़ने या नयी चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हूँ? निरंतर अभ्यास का मतलब है, केवल कर्म करना नहीं, बल्कि खुद को हर रूप में तैयार करना।
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