GYAN MANDIR CHANNEL(Worldwide)🕉️
June 19, 2025 at 08:50 AM
👍स्वामी विवेकानंद के जीवन पर आधारित एक सच्ची घटना का कथा चित्रण ...
👍न्यूयार्क में एक बड़े पत्रकार एक साधु का इंटरव्यू ले रहे थे।
👍पत्रकार- "श्रीमान, आपकी *संपर्क* (Contact) और *जुड़ाव* (Connection) पर वार्ता बहुत भ्रमित करने वाली थी। क्या आप इनका अंतर समझा सकते हैं ?"
👍साधु मुस्कराये और उन्होंने पलटकर पत्रकार से ही पूछना शुरू कर दिया, "क्या आप न्यूयॉर्क से हैं ?"
👍पत्रकार: "हाँ!..."
👍संन्यासी: "आपके घर में कौन-कौन हैं ?"
👍पत्रकार को लगा कि साधु उनका सवाल टालने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि उनका सवाल बहुत व्यक्तिगत और उसके सवाल के जवाब से अलग था।
👍फिर भी पत्रकार बोला : "मेरी माँ अब नहीं हैं, पिता हैं तथा तीन भाई और एक बहन हैं। सब शादीशुदा हैं।"
👍साधू ने चेहरे पर मुस्कान लाते हुए पूछा, "आप अपने पिता से बात करते हैं ?"
👍पत्रकार के चेहरे से गुस्सा झलकने लगा।
👍साधू ने पूछा, "आपने अपने पिता से अंतिम बार कब बात की थीं ?"
👍पत्रकार ने अपना गुस्सा दबाते हुए जवाब दिया , "शायद एक महीने पहले।"
👍साधू ने पूछा: "क्या आप भाई-बहन अक़्सर मिलते हैं? आप सब आखिरी बार कब मिले? एक परिवार की तरह !"
👍इस सवाल पर पत्रकार के माथे पर पसीना आ गया कि इंटरव्यू मैं ले रहा हूँ या यह साधु ?
👍ऐसा लगा साधु, पत्रकार का इंटरव्यू ले रहे है ?
👍एक आह के साथ पत्रकार बोला: "क्रिसमस पर, दो साल पहले!"
👍साधू ने पूछा: "कितने दिन आप सब साथ में रहे ?"
👍पत्रकार अपनी आँखों से निकले आँसुओं को पोंछते हुये बोला : "तीन दिन..."
👍साधु: "कितना वक्त आप भाई-बहनों ने अपने पिता के बिल्कुल करीब बैठ कर गुजारा?
👍पत्रकार हैरान और शर्मिंदा दिखा और एक कागज़ पर कुछ लिखने लगा।
👍साधु ने पूछा: "क्या आपने पिता के साथ नाश्ता या खाना खाया? क्या आपने अपने पिता से पूछा कि वे कैसे हैं? माता की मृत्यु के बाद उनका वक्त कैसे गुज़र रहा है ?"
👍साधु ने पत्रकार का हाथ पकड़ा और कहा: "शर्मिंदा, या दुःखी मत होना। मुझे खेद है अगर मैंने आपको अनजाने में चोट पहुँचाई हो! लेकिन यह ही आपके सवाल का जवाब है। "संपर्क और जुड़ाव।"
👍आप अपने पिता के सिर्फ *'संपर्क'* (Contact) में हैं, पर आपका उनसे कोई *'जुड़ाव'* (Connection)नहीं हैं।
👍आप अपने भाई-बहिन से संपर्क में हैं, जुड़े नहीं हैं। जुड़ाव हमेशा आत्मा से आत्मा का होता है, दिल से दिल का होता है।
👍एक साथ बैठना, भोजन साझा करना और एक दूसरे की देखभाल करना, स्पर्श करना, हाथ मिलाना, आँखों का संपर्क होना, कुछ समय एक साथ बिताना ।
👍आप अपने पिता, भाइयों और बहन के संपर्क में हैं लेकिन आप लोगों का आपस में कोई जुड़ाव नहीं हैं।"
👍पत्रकार ने आँखें पोंछी और बोला: "मुझे एक अच्छा सबक सिखाने के लिए आपका साधुवाद।"
👍आज यह भारत की भी सच्चाई हो चली है। सबके हज़ारों संपर्क हैं पर कोई *जुड़ाव* नहीं हैं, कोई विचार-विमर्श नहीं है।
👍हर आदमी अपनी-अपनी दुनिया में खोया हुआ है।
वे साधु और कोई नहीं , "स्वामी विवेकानंद" थे।”