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February 16, 2025 at 07:57 AM
*किताबें जलाने की धमकी के बाद पुस्तक मेला रद्द ।*
*अब पुस्तक मेले से भी तथाकथित 'हिंदू भावनाएं' आहत होने लगी हैं। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार बारहवां पुस्तक मेला'किताब कौतुक ' के नाम से पौड़ी गढ़वाल सेंट्रल यूनिवर्सिटी मेंहोनेवाला था। इसमें करीब 70* *हजार किताबों में से अपनी पसंद की पुस्तकें पाठक खरीद सकते थे, देख सकते थे, छू सकते थे मगर संघ परिवार ने यह सुनिश्चित किया कि इस प्रदेश की जनता इससे वंचित रहे।संघ हमेशा से किताबों से डरता आया है, विरोधी विचारों से कांपता आया है,हालांकि तथाकथित बौद्धिक का आयोजन न जाने कब से वह करता आ रहा है।संघ परिवार को डर था कि इसमें कम्युनिस्ट विचारधारा की किताबें भी होंगी और इनसे हिंदुओं की' धार्मिक भावनाएं ' आहत होंगी।*
*इस बहाने सबसे पहले पौड़ी गढ़वाल के श्रीनगर में सरकारी गर्ल्स इंटरकालेज में जनवरी महीने में यह मेला संघ ने आयोजित नहीं होने दिया।फिर हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में इसके आयोजन का प्रयास किया गया।विवि सहमत हो गया।विवि ने सीनेट हाल में एक संगोष्ठी के आयोजन की भी सहमति जताई। वहां भी दबाव डाला गया।विवि ने अनुमति वापस ले ली।इसके बाद शहर के रामलीला मैदान में लिखित अनुमति रामलीला कमेटी ने दे दी। उसके बाद उसी दिन उसी समय संघ ने अपना आयोजन रख दिया।संघ से जब पंगा विवि नहीं ले सकता, सरकारी गर्ल्स इंटर कालेज नहीं ले सकता तो रामलीला कमेटी कैसे ले सकती थी?*
*किताबें जलाने की धमकी के बाद किताब कौतुक के आयोजक भी अब पीछे हट गए हैं। अब उत्तराखंड के पुस्तक प्रेमियों को पता नहीं कब ऐसा अवसर मिले कि किताबें उनके दरवाजे आ सकें।गनीमत है कि दिल्ली, लखनऊ,पटना, कोलकाता आदि में अभी ऐसे हालात नहीं हुए हैं मगर खतरे की घंटी समझिए कि वहां के लिए भी बज चुकी है।*
*--विष्णु नागर*