Shivraj Singh Chouhan
February 19, 2025 at 04:16 AM
*एक रोपा गया पौधा*
*विशाल वृक्ष बन जाता है।*
*जीवन देता है, जीना सिखाता है।*
*वृक्ष गुरु है, सखा है, पालनकर्ता है।*
*प्रतिदिन पौधारोपण के संकल्प को चार साल पूरे हुए,*
*यही प्रार्थना है कि ये कार्य जीवनपर्यंत सिद्ध होता रहे,*
*हाथ से हाथ मिलते रहें,*
*लोग जुड़ते रहें…*
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