पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ जी
February 21, 2025 at 04:03 AM
मित्रो ,
हमारे हिन्दुस्थान में 2 नारे बड़े ही प्रसिद्ध हुए ...... हिंदी चीनी भाई भाई..... हिन्दू मुस्लिम सिक्ख ईसाई आपस मे हम भाई भाई ।
वास्तव में देखा जाए तो हम भारत के लोग मूर्ख ही रहे हैं कि हम केवल नारों से ही बहकावे में आ जाते हैं भावविभोर हो उठते हैं और एक हुजूम के रूप में नारों का ही अनुगमन करते हैं बड़े ही भावुक होकर ,
लेकिन इन नारों की सच्चाई क्या है वो कभी जानने की कोशिश ही नही करते .... बस नेता ने नारा दिया और हमने उसे बीजमन्त्र मान के रटना शुरू कर दिया पर क्या कभी सोचा कि नारों के पीछे की सच्चाई क्या है ?
राष्ट्र की आजादी से पहले नारा दिया गया - हिन्दू मुस्लिम सिक्ख ईसाई आपस मे हम भाई भाई ,
शायद ठरकी अय्याश गांधी ने दिया ये नारा और फिर ये हर हिन्दू की जुबान पर चढ़ गया ,
एक कपोल कल्पित धारणा बना दी गई कि मुल्ले व ईसाई हमारे भाई हैं,
हाँ सिक्ख तो वास्तव में ही हमारे भाई हैं ही इसमें नारा लगाने वाली क्या बात भई ?
नारा लगा के बताने वाली तो कोई बात ही नही ,
क्या अपने सगे भाई के बारे में चिल्ला चिल्ला के बताया जाता है कि ये मेरा सगा भाई है ?
लेकिन इसमें भी एक राज था जो समय आने पर खुलता जा रहा,
कि किस प्रकार हिन्दू व सिक्ख को भाई भाई नारे लगवा कर अलग अलग करवा कर सिक्खी को एक अलग धर्म के रूप में स्थापित करवा दिया गया शनः शनः ,
और हिन्दू मुस्लिम भाई भाई का नतीजा आजादी से पहले तो मोपला हत्या काँड जिसमें हजारों हिंदु पुरुषों की हत्या हुई हिन्दू महिलाओं का बलात्कार हुआ उसे उस नीच गांधी ने गलत न कह के मुसलमानों को बहादुर कहा,
फिर डायरेक्ट एक्शन के नाम पर जिन्नाह ने हजारों हिंदुओं को कटवाया .... नारा कायम रहा कि हिन्दू मुस्लिम भाई भाई ,
फिर आजादी आई राष्ट्र का बंटवारा हुआ और फिर से हिंदुओं को काटा गया सीमा रेखा के इधर भी और उधर भी ,
फिर लुट पिट के ये देश बसाया लेकिन नारा वही रहा .. हिन्दू मुस्लिम सिक्ख ईसाई आपस मे हम भाई भाई ,
चलो जी चले कुछ कदम पर देश कहीं न कहीं दंगे होते रहे और हिन्दू साफ होते रहे ,
फिर हमारे महान जननायक शांति के अग्रदूत नेहरू ( वैसे इस्लाम को भी शांति का मजहब कहा जाता है दुनिया मे )
कबूतर उड़ा उड़ा दुनिया मे शांति का संदेश दे रहे थे कि उनके मनोमस्तिष्क में एक और नया नारा घुमड़ के आया - हिंदी चीनी भाई भाई ,
अब भई शांति के पहरुआ हैं तो फौज पुलिस हथियार की क्या आवश्यकता ?
हम तो बुद्ध के पूजक हम तो गांधी अहिंसा के सिद्धांत के सिपहसालार हमे फौज पुलिस हथियार की क्या आवश्यकता जी ?
हम तो विश्व मे शांति फैला के ही मानेंगे चाहे उसके लिए हम ब्रिटिश वॉइसरॉय की पत्नी के कदम चूमे या बोसा दें पर शांति हर हाल में चाहिए ही चाहिए ,
लो जी हमारी हथियार बनाने की सबसे बड़ी फेक्ट्री थी कानपुर में उसको हमने कन्वर्ट करके हथियार बनाने के बजाए जूते बनाने की फैक्ट्री बना डाला क्योंकि हथियार हम क्यों बनाएं भई ?
हमे तो जरूरत ही नही हथियार की हम तो शांतिपूजक लोग,
लो जी आओ जी चीन के प्रधानमंत्री जी देखो न जी हमने हथियार फैक्ट्री को जूता फेक्ट्री बना दिया है आप आके विजिट करो देखो कि कितने शांतिप्रिय लोग हैं हम ,
देख गया चीनी प्रधानमंत्री और जाते ही बोल दिया हमला भारत की लगभग निहत्थी फौज पर .....
पर कहाँ वो 4 फुटिये चाउमीन और कहाँ हमारे 6 फुट से भी अधिक के घी दूध वाले ,
सौ सौ से एक लड़ा पर संसाधनों से मात खा गए वीर जवान ,
राष्ट्र के राजनैतिक नेतृत्व ने मरवा दिया फौलादी सैनिकों को ...
और नतीजा हजारों किलोमीटर भारतभूमि जिसमे हमारे आराध्य कैलाश मानसरोवर भी हैं वो चीन ने कब्जा लिया ,
तो ये था उस कुत्ते नेहरू का हिंदी चीनी भाई भाई का स्लोगन जो देश ने भुगता व भुगत रहा,
अब आते हैं इस नारे के ईसाई भाई पर ,
तो मित्रो भाई बना के इस्लाम से कटवाया भाई बना के चीनियों से कटवाया पर सबसे भयंकर हमे नुकसान ईसाई नामक भाई से हुआ व हो भी रहा ,
इस्लाम ने जो कुछ किया खुल के किया हमे पता लगा कि इस्लाम ने ये किया , चीनीयों ने जो किया खुल के किया हमे ज्ञात है कि उनने क्या किया पर ईसाई भाई तो चुपके चुपके शांति से जड़ खोद रहे कब से हिंदुत्व की ,
जितना नुकसान इस्लाम नही कर पाया जोर जुल्म से उस गुणात्मक रूप से ईसाई ने किया व कर रहे,
पूरा ही पूर्वोत्तर भारत कब मन्दिर से चर्च हो गया पता ही नही चला,
बिहार बंगाल झारखंड छत्तीसगढ़ मध्यप्रदेश आदि के गरीब तबकों को कन्वर्ट कर कब हरयाणा पँजाब जैसे समृद्ध राज्यों में ये मिशन वाले आ घुसे पता ही नही चल पाया न ,इसने सबसे ज्यादा निगला हिन्दू को ।
अब कल हो एक खबर आई कि मुसलमानों के सबसे पवित्र शहर मदीना में एक 6 वर्ष के बच्चे को हलाल कर दिया गया क्योंकि वो वो मुसलमानों के एक शिया समुदाय से था तो सुन्नी ने उसे इस काबिल नही समझा कि वो काबा की इबादत कर सके ,
तो मियाँ जो कौम अपने भाई की ही भाई नही वो हम हिंदुओ के भाई किस प्रकार हो सकते हैं .....?
बस नारों से बरगलाया हमे और कटवा दिया गया यही हकीकत है इन नारों की ,
पोस्ट लम्बी हो चली इसलिए इतिश्री कर रहा गुब्बार था निकाल दिया आपने पढ़ा क्या असर हुआ आप पर आप जानें ,
राजा राम चन्द्र की जय ।
#संजय_उवाच
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