PAHAL
February 4, 2025 at 10:46 AM
।। प्रार्थना।।
भक्त खड़ा तेरे द्वार, सुन लो मात पुकार।।
तेरी चरण रज को मैं, लूॅं मस्तक पर धार।
अपने अश्रु जल से हीं , दूॅं मॉं चरण पखार।
दो बतला हम क्या रचें, शब्दों को दो- चार।
भक्त खड़ा तेरे द्वार, सुन लो मात पुकार।।
वर्ण सीपि को बिन चुनें, बना न पाऊॅं हार।
मैं मतिमंद कहॉं चुनूॅं , सिंधु गर्त निस्तार।
तेरी वर्णन कर सकूॅं, दो लेखन को धार।
भक्त खड़ा तेरे द्वार, सुन लो मात पुकार।।
सात सुरों से लय सजा, छेड़ो वीणा तार।
स्वर ज्ञान का दान करो, सुर-लय मात निखार।
नीर क्षीर विवेक भरो, होकर हंस सवार।
भक्त खड़ा तेरे द्वार, सुन लो मात पुकार।।
कलुष पंक मॉं नाश कर, उत्पल करो विचार।
रख दो सिर पर हाथ मॉं, कीर्ति करो विस्तार।
निर्मल मन मेरा रहे, कर दो मॉं उपकार।
भक्त खड़ा तेरे द्वार, सुन लो मात पुकार।।
सद कर्म में लीन रहें, कर दो पथ गुलजार।
नज़रिया फेर कर मातु, कर दो तुम उद्धार।
ऐसा वर मुझे दो मॉं, हों भव सागर पार।
भक्त खड़ा तेरे द्वार, सुन लो मात पुकार।।
रचयिता - राम किशोर पाठक
प्राथमिक विद्यालय भेड़हरिया इंगलिश पालीगंज पटना।
संपर्क - 9835232978
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