Galatfahmiyon Ki Islah
Galatfahmiyon Ki Islah
February 11, 2025 at 07:39 AM
⚠️ वैलेंटाइन डे की सिर्फ़ मज़म्मत काफ़ी है? ⚠️ मुस्त़फ़ा कमाल, जदीद तुर्कों का क़ाइदे आ'ज़म है. ये एक बे-दीन और इस्लाम दुश्मन शख़्स था, लेकिन इसे आज भी "अतातुर्क" या'नी तुर्कों का बाप कहा जाता है. मौजूदा तुर्क सदर की सोच और फ़िक्र अतातुर्क से यक्सर मुख़्तलिफ़ है और लाज़िमी त़ौर पर वो इसके मुल्ह़िदाना अ़क़ाइद व नज़रियात से भी बेज़ार होंगे. लेकिन.......... उन्होंने इसकी मुख़ालिफ़त के बजाए, इसके फैलाए हुए कुफ़्रो इल्ह़ाद को ख़त्म करने की कोशिश की है और इसमें कामियाब भी रहे हैं. 📙 [तह़रीराते लुक़मान, सफ़ह़ा नं. 553, नाशिर: साबिया वर्चुअल पब्लिकेशन] अगर मौजूदा तुर्क सदर, मुस्त़फ़ा कमाल पाशा की सिर्फ़ मज़म्मत करते रहते और उसकी फैलाई हुई बुराइयों के ख़िलाफ़ कुछ न करते, तो आज तुर्की में जो बदलाव देखने को मिल रहा है, कभी देखने को मिलता? वैलेंटाइन डे के मज़म्मत करनी चाहिए, लेकिन इसे रोकने के लिए, इसके मुतबादिल कामों (निकाह़ वग़ैरह) को आ़म करने की भी कोशिश करनी चाहिए. अ़ल्लामा लुक़मान शाहिद ह़फ़िज़हुल्लाह लिखते हैं: आज वैलेंटाइन डे की मज़म्मत करनी चाहिए, ज़रूर करनी चाहिए; लेकिन सिर्फ़ इस डे की मज़म्मत ही काफ़ी नहीं; लोगों को इसके मुतबादिल निकाह़ की भरपूर तरग़ीब भी दिलानी चाहिए; निकाह़ को आ़म करने का रुझान भी पैदा करना चाहिए. ये बताना चाहिए के जिससे तुम्हें मुह़ब्बत हो, पहले उससे निकाह़ करो, फिर उसे जहां चाहे, साथ ले जाओ; जो चाहे, तोह़फ़ा दो; जैसे चाहो, मुह़ब्बत का इज़हार करो; एक ही फूल क्यों? पूरा गुलिस्तान उस पर निछावर कर दो. मज़ीद लिखते हैं: आप अगर मुआ़शरे में सरायत-कर्दा किसी ना-जाइज़ चीज़ को ख़त्म करना चाहते हैं, तो उसका जाइज़ मुतबादिल पेश करें, ना-जाइज़ ख़ुद बख़ुद दम तोड़ जाएगा. आज हमारे मुआ़शरे में निकाह़ आ़म होगा, तो ज़िना ख़त्म होना शुरूअ़ हो जाएगा और वैलेंटाइन डे जैसे गंदे तेहवार अपनी मौत आप मर जाएंगे. 📙 [तह़रीराते लुक़मान, सफ़ह़ा नं. 128, नाशिर: साबिया वर्चुअल पब्लिकेशन] मा'ज़रत के साथ: आज जो वैलेंटाइन डे की मज़म्मत कर रहे हैं (और करना चाहिए) उनमें बहुत-से ऐसे हैं, जो जाने-अनजाने में वैलेंटाइन डे को आ़म करने में मुलव्वस हैं, इस त़रह़ के अपनी औ़रतों को ख़ुद दूसरों से मिलने के लिए आज़ाद छोड़े हुए हैं; और दूसरी त़रफ़ निकाह़ को मुश्किल बना रहे हैं. — मैंने किसी पर तन्क़ीद नहीं की, बस वो ह़क़ीक़त ज़ाहिर करने की कोशिश की है, जिससे आज सब भागने की कोशिश कर रहे हैं. ______________ मुह़म्मद ज़ैद रज़ा क़ादिरी 11/02/2025
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