मुकेश कुमार सुवालका राजीव वादी
मुकेश कुमार सुवालका राजीव वादी
February 12, 2025 at 02:14 AM
नीम , पीपल , बरगद का छाव याद आता हैं. जब भी होता हूँ तन्हा मुझे गांव याद आता हैं. बरसो हों गये मुझे तुझसे बिछड़े हुए लेकिन, बचपन के हर दोस्त का नाव याद आता है.
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