धर्म ज्ञान R P Pathak
February 26, 2025 at 02:18 PM
महाशिवरात्रि को
भगवान शिव अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करते हैं।
महाशिवरात्रि के दिन
भगवान शिव के भक्त काफी हर्षोल्लास से उत्सव मनाते हैं।
कुछ लोग
इस दिन जागरण करवाते हैं
तो कुछ लोग भगवान शिव की पूजा करवाते हैं।
महाशिवरात्रि
इस दिन भगवान शिव
बुरी शक्तियों का संहार करते हैं और उनके साम्रज्य का विनाश करते हैं।
शिवरात्रि शब्द का अर्थ
शिव की रात
उस दिन आपके शरीर में ऊर्जा कुदरती रूप से ऊपर की ओर चढ़ती है।
इसका लाभ उठाने के लिए कुछ लोग योग साधना ध्यान करते हैं।
महाशिवरात्रि पर्व
हमारी चेतना को बढ़ाने का और ध्यान के माध्यम से प्राण शक्ति को बढ़ाकर अपने स्त्रोत की ओर ले जाने का।
महाशिवरात्रि की रात की
नक्षत्रों की स्थिति ध्यान के लिए बहुत शुभ मानी जाती है।
इसलिए जिन लोगों को अपनी ऊर्जा का स्तर उठाना है उन लोगों को शिवरात्रि पर जागते रहना चाहिए और ध्यान करना चाहिए ।
यदि आप हर दिन ध्यान नहीं कर सकते हैं तो साल में कम से कम एक दिन ध्यान अवश्य करें।
महाशिवरात्रि को
रात्रि जागरण करें और ध्यान करें।
महाशिवरात्रि के दिन
ॐ नम: शिवाय ||
मंत्र का उच्चारण सबसे लाभदायक है।
यह मंत्र तुरंत ही आपकी उर्जा को ऊपर उठाता है।
मंत्र में "ॐ" की ध्वनि ब्रह्मांड की ध्वनि है।
जिसका तात्पर्य है प्रेम और शान्ति।
"नम: शिवाय" में यह 5 अक्षर "न" "म" "शि" "वा" "य"
5 तत्त्वों की ओर इशारा करते हैं।
वह 5 तत्त्व हैं
पृथ्वी जल अग्नि वायु और आकाश।
ॐ नम: शिवाय ||
का जप करने से ब्रह्मांड में मौजूद इन 5 तत्त्वों में सामंजस्य पैदा होता है।
जब इन 5 तत्त्वों में प्रेम शान्ति का सामंजस्य होता है तब परमानंद प्रस्फुटित होता है।
रूद्र पूजा
या महाशिवरात्रि पूजा
भगवान शिव के सम्मान में की जाने वाली पूजा है।
महाशिवरात्रि के दिन
रूद्र पूजा का बड़ा महत्व है
इस पूजा में विशेष अनुष्ठानों के साथ वैदिक मंत्रों का उच्चारण भी शामिल है।
रूद्र पूजा से वातावरण में सकारात्मकता और पवित्रता का उदय होता है।
यह नकारात्मक विचारों और भावनाओं को परिवर्तित कर देता है।
पूजा में बैठने से और मंत्रों को सुनने से मन सहज ही गहन ध्यान में उतर जाता है।
शिवलिंग की उपासना शिवलिंग निराकार शिव का ही प्रतीक है।
शिवलिंग पूजा में बेल पत्र अर्पण किया जाता है। शिवलिंग को बेल पत्र अर्पण करना अर्थात 3 गुण शिव तत्व को समर्पित कर देना।
तमस
वह गुण जिससे जड़ता उत्त्पन होती है।
रजस
वह गुण जो गतिविधियों का कारक है।
सत्व
वह गुण जो सकारात्मकता रचनात्मकता और जीवन शान्ति लाता है।
ये तीनों गुण
आपके मन और कार्यों को प्रभावित करते हैं।
इन तीनों गुणों को दिव्यता को समर्पण करने से शांति और सकारात्मक प्राप्त होती है।
महाशिवरात्रि वह दिन है
जब हम भगवान शिव की अराधना करते हैं।
महाशिवरात्रि के दिन अधिकतर लोग ध्यान पूजा और शिव भजन गाकर उत्सव मानते हैं।
हर हर शम्भु
🙏
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