सभ्यता संस्कार मनोरंजन की पाठशाला।✅
सभ्यता संस्कार मनोरंजन की पाठशाला।✅
February 14, 2025 at 05:52 AM
जला अस्थियाँ बारी-बारी चिटकाई जिनमें चिंगारी, जो चढ़ गये पुण्यवेदी पर लिए बिना गर्दन का मोल कलम, आज उनकी जय बोल। जो अगणित लघु दीप हमारे तूफानों में एक किनारे, जल-जलाकर बुझ गए किसी दिन माँगा नहीं स्नेह मुँह खोल कलम, आज उनकी जय बोल। अंधा चकाचौंध का मारा क्या जाने इतिहास बेचारा, साखी हैं उनकी महिमा के सूर्य चन्द्र भूगोल खगोल कलम, आज उनकी जय बोल। सभी शहीदों को उनके सर्वोच्च बलिदान पर शत शत नमन 🙏🙏 जय हिन्द, जय हिन्द की सेना 🇮🇳🇮🇳
🇮🇳 🙏 2

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