Home Remedies
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May 27, 2025 at 11:39 AM
ऋतु (मौसम) के अनुसार जीवनशैली और आहार-विहार को समायोजित करना नेचुरोपैथी और आयुर्वेद दोनों में अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। *इसे हम "ऋतुचर्या" कहते हैं*।* https://whatsapp.com/channel/0029VaY8gyE7dmejCRTiwP3Nनीचे मैं भारत की मुख्य 6 ऋतुओं के अनुसार स्वास्थ्य-संरक्षण के नेचुरोपैथिक उपाय बता रहा हूँ: --- 1. वसंत ऋतु (फरवरी मध्य – अप्रैल मध्य) प्रकृति: कफ का प्रकोप सामान्य लक्षण: एलर्जी, सर्दी-जुकाम, आलस्य उपाय: गर्म पानी से स्नान नीम, गिलोय, हल्दी का सेवन उपवास / फलाहार करें व्यायाम व प्राणायाम से कफ को संतुलित करें --- 2. ग्रीष्म ऋतु (अप्रैल मध्य – जून मध्य) प्रकृति: वात-वृद्धि व जल-हानि सामान्य लक्षण: लू लगना, डिहाइड्रेशन, चक्कर उपाय: बेल, आमपना, शिकंजी जैसे शीतल पेयों का सेवन खीरा, ककड़ी, तरबूज, नींबू पानी धूप से बचाव; सिर ढकें मिट्टी की पट्टी पेट पर व सिर पर ठंडी --- 3. वर्षा ऋतु (जून मध्य – अगस्त मध्य) प्रकृति: वात व पाचन शक्ति की दुर्बलता सामान्य लक्षण: अपच, गैस, सर्दी उपाय: हल्का, सुपाच्य भोजन (खिचड़ी, सूप) अदरक, हींग, अजवायन का प्रयोग गीले कपड़ों से बचें पैरों की सफाई पर विशेष ध्यान दें --- 4. शरद ऋतु (अगस्त मध्य – अक्टूबर मध्य) प्रकृति: पित्त वृद्धि सामान्य लक्षण: स्किन एलर्जी, एसिडिटी, आँखों की जलन उपाय: आँवला, एलोवेरा, चंदनयुक्त पेय ठंडी तासीर वाले फल (अनार, नारियल पानी) सूर्य नमस्कार व शीतल प्राणायाम --- 5. हेमंत ऋतु (अक्टूबर मध्य – दिसंबर मध्य) प्रकृति: वात-कफ संतुलन सामान्य लक्षण: त्वचा की रूखापन, जोड़ों का दर्द उपाय: गर्म तेल मालिश (तिल तेल) गरम पानी पीना, सूखे मेवे का सेवन हल्की धूप लेना लाभकारी --- 6. शिशिर ऋतु (दिसंबर मध्य – फरवरी मध्य) प्रकृति: वात वृद्धि सामान्य लक्षण: सर्दी, खांसी, जकड़न उपाय: गरम कपड़े पहनें तुलसी, अदरक, शहद का सेवन स्टीम इनहेलेशन, नेति क्रिया व्यायाम और सूर्य स्नान
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