Home Remedies
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June 10, 2025 at 07:54 AM
*स्वर विज्ञान* *इस विज्ञान का अनुसरण करके बहुत कुछ किया जा सकता है* श्वास-प्रश्वास की क्रिया दोनों नासिका से क्रमशः चलती रहती है यही स्वर विज्ञान है । बायीं नासिका से आने वाली श्वास शरीर को ठंडक देती है, दायीं नासिका से आने वाली श्वास शरीर को गर्मी और ऊर्जा देती है। पूरे दिन भर में कुछ समय के लिए श्वास प्रश्वास की क्रिया दोनों नासिका से होती है। श्वास प्रश्वास की इन क्रियाओं का नाम इड़ा, पिंगला, सुषुम्ना है, इसके अलावा चन्द्र नाड़ी, सूर्य नाड़ी और मध्य नाड़ी भी कहते हैं। यदि हम श्वर विज्ञान को अच्छे से समझ लें और उस अनुसार श्वास प्रश्वास की क्रिया को करें तो अधिकांश बीमारी को बिना दवा से ठीक कर सकते हैं।कफ जनित रोग, गठिया वात,लो बीपी होने पर, शरीर में थकान हो, ऊर्जा न हो तो सूर्य स्वर को चलाना चाहिए उसके लिए बायीं नासिका छिद्र को बंद कर दें या बायीं करवट लेट जाएं या बायीं तरफ झुक जाएं तो सूर्य स्वर चलने लगेगा।हाई बीपी,बढ़ा हुआ पित्त जनित रोग, भयंकर खुजली शरीर में जलन होने पर दायीं नासिका छिद्र को बंद करके बायीं नासिका से श्वास प्रश्वास की क्रिया करें या दायें करवट लेट जाएं या झुक जाएं। कौन सा स्वर कब चलाएं उसके लिए एक सामान्य नियम है कि सूर्योदय के बाद पूरे दिन चन्द्र नाड़ी चलनी चाहिए और रात्रि में सूर्य नाड़ी। सबसे अच्छी मध्य नाड़ी (सुषुम्ना नाड़ी) मानी गई है।योगी जन और साधक की सुषमा नाड़ी सक्रिय हो जाती है, सुषुम्ना नाड़ी के सक्रिय होने का मतलब है कुंडलिनी जागरण की क्रिया की शुरुआत होना। कुछ दिनों के अभ्यास से जब हम इड़ा,पिंगला नाड़ी को साध लेते हैं तो सुषुम्ना नाड़ी भी चलना शुरू हो सकती है। https://whatsapp.com/channel/0029VaY8gyE7dmejCRTiwP3N
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