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June 8, 2025 at 08:28 AM
#धूमावती_कवच
क्या आपने कभी सोचा है कि जीवन में बार-बार असफलता, रोग, दरिद्रता या मानसिक तनाव क्यों आता है, जबकि आप पूरी निष्ठा से मेहनत करते हैं? शायद आपको धूमावती देवी की साधना की आवश्यकता है। धूमावती देवी, दस महाविद्याओं में से एक, एकमात्र ऐसी देवी हैं जो विधवा रूप में पूजी जाती हैं और जीवन के कटु यथार्थ की प्रतीक मानी जाती हैं। उनकी कृपा से ही व्यक्ति हर प्रकार के भय, शत्रु बाधा, तांत्रिक प्रहार और मानसिक उलझनों से बाहर निकल पाता है।धूमावती कवच एक ऐसा दिव्य संरक्षण सूत्र है, जो साधक को अदृश्य सुरक्षा प्रदान करता है। यह सिर्फ एक पाठ नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली ऊर्जा कवच है।
माँ धूमावती कवच •श्रीधूमावतीकवचम्•
श्रीगणेशाय नमः ।
#अथ_धूमावती_कवचम्
श्रीपार्वत्युवाच –धूमावत्यर्चनं शम्भो श्रुतं विस्तरतोमया ।कवचं श्रोतुमिच्छामि तस्या देव वदस्व मे ॥ १॥
श्रीभैरव उवाच –शृणुदेवि परं गुह्यं न प्रकाश्यं कलौयुगे ।कवचं श्रीधूमावत्याश्शत्रुनिग्रहकारकम् ॥ २॥
ब्रह्माद्यादेवि सततं यद्वशादरिघातिनः ।योगिनोभवछत्रुघ्ना यस्याध्यान प्रभावतः ॥ ३॥
ॐ अस्य श्रीधूमावतीकवचस्य पिप्पलाद ऋषिः अनुष्टुप्छन्दः श्रीधूमावती देवता•धूं बीजम् स्वाहाशक्तिः धूमावती कीलकम् शत्रुहनने पाठे विनियोगः ।
ॐ धूं बीजं मे शिरः पातु धूं ललाटं सदावतु ।धूमानेत्रयुगं पातु वती कर्णौसदावतु ॥ ४॥दीर्घातूदरमध्ये तु नाभिं मे मलिनाम्बरा ।शूर्पहस्ता पातु गुह्यं रूक्षारक्षतु जानुनी ॥ ५॥मुखं मे पातु भीमाख्या स्वाहा रक्षतु नासिकाम् ।सर्वं विद्यावतु कष्टं विवर्णा बाहुयुग्मकम् ॥ ६॥ चञ्चला हृदयं पातु दुष्टा पार्श्वं सदावतु ।धूतहस्ता सदा पातु पादौ पातु भयावहा ॥ ७॥ प्रवृद्धरोमा तु भृशं कुटिला कुटिलेक्षणा । क्षृत्पिपासार्दिता देवी भयदा कलहप्रिया ॥ ८॥ सर्वाङ्गं पातु मे देवी सर्वशत्रुविनाशिनी ।इति ते कवचं पुण्यं कथितं भुवि दुर्लभम् ॥ ९॥ न प्रकाश्यं न प्रकाश्यं न प्रकाश्यं कलौ युगे ।पठनीयं महादेवि त्रिसन्ध्यं ध्यानतत्परैः ।दुष्टाभिचारो देवेशि तद्गात्रं नैव संस्पृशेत् ॥ १०॥ इति भैरवी भैरव संवादे धूमावती तत्त्वे धूमावती कवचं सम्पूर्णम् ।
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