Mazdoor Bigul मजदूर बिगुल www.mazdoorbigul.net
June 4, 2025 at 05:14 AM
एक बिल्ली थी जिसने कभी ख़ून का स्वाद नहीं चखा था। एक दिन घर में काम कर रहे एक बढ़ई की आरी पर उसने पहली बार ख़ून चखा।
आरी से काम करते हुए बढ़ई की उँगली कट गई थी और वह मरहम-पट्टी करवाने बाहर गया था।
बिल्ली ने आरी को चाटा और उसे ख़ून का स्वाद मिला।
उसे स्वाद पसन्द आया और वह आरी को तब तक चाटती रही जब तक कि सारा ख़ून साफ़ नहीं हो गया।
आरी पर लगा ख़ून ख़त्म हो गया लेकिन बिल्ली को अब ख़ून का स्वाद लग गया था।
उसने फिर से आरी को चाटना शुरू किया और चमत्कारिक रूप से उसे और ख़ून नज़र आया।
वह ख़ुश होकर उसे जल्दी-जल्दी चाटने लगी। ख़ून चाटने में उसे इतना मज़ा आ रहा था कि उसे एहसास ही नहीं हुआ कि अब वह अपना ही ख़ून चाट रही है....
....बहुतेरे देशवासी अभी इसी हालत में हैं।
सत्ता और भाजपा ने उन्हें दूसरों का ख़ून चखाया और अब उन्हें ख़ून की प्यास लग गई है, और वे ख़ून चाटने में मगन हैं, बिना यह जाने कि अब वे अपना ही ख़ून चाट रहे हैं....
(दर्शन मोंडकर की वॉल से अनूदित)
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