दैनिक सुविचार 🌺🏵️😊🙋‍♂️
June 1, 2025 at 02:04 AM
1.6.2025 *"बहुत से लोग दिन भर बोलते रहते हैं। वे बोलने से पहले विचार ही नहीं करते, या बहुत कम विचार करते हैं, शब्दों का चुनाव या नहीं करते या बहुत कम करते हैं। जो भी मन में आए, वही बोल देते हैं।"* इतना भी नहीं सोचते, कि *"जिससे मैं बात कर रहा हूं, वह व्यक्ति मुझसे छोटा है अथवा बड़ा है? समाज में उसकी प्रतिष्ठा कितनी है? मेरे शब्दों का उस व्यक्ति पर अच्छा या बुरा, कैसा प्रभाव पड़ेगा?"* *"ऐसा करना उचित नहीं है। क्योंकि ऐसा करने से वक्ता के शब्दों का प्रभाव अधिकतर समाप्त हो जाता है।" धीरे-धीरे लोग समझ लेते हैं, कि "यह व्यक्ति बिना प्रसंग की बात बोलता है। बिना प्रमाण और तर्क से परीक्षा किए कुछ भी बोल देता है। जिस कारण से अनेक स्थानों पर इसकी बात झूठी भी सिद्ध हो जाती है।"* *"किसी किसी व्यक्ति को भाषा का ज्ञान भी कम होता है। इसलिए वह अपने विचार ठीक प्रकार से व्यक्त नहीं कर पाता। परिणामस्वरूप दूसरों को अनेक प्रकार की भ्रांतियां हो जाती हैं। उससे व्यवहार में अनेक कठिनाइयां उत्पन्न होती हैं। अनेक बार झगड़े भी हो जाते हैं। क्योंकि कहने और सुनने में विषय की स्पष्टता ठीक से नहीं हो पाती।"* *"कहीं-कहीं पर व्यक्ति बुद्धि का स्तर कम होने से दूसरे व्यक्ति की बात को ठीक तरह से समझ भी नहीं पाता।"* *"अनेक बार व्यक्ति लापरवाही से बात करता और सुनता है। ऐसे अवसरों पर भी बहुत सी गलतियां हो जाती हैं।"* *"इन सब दोषों से बचने के लिए पहले भाषा को ठीक प्रकार से सीखें, समझें। और बोलने से पहले अनेक बार विचार करें, शब्दों का चुनाव करें, कि "मुझे किस व्यक्ति के साथ कैसी भाषा बोलनी है। किन शब्दों को बोलना है, जिससे कि मेरी बात में स्पष्टता भी रहे, और उसका सम्मान भी बना रहे। दूसरों को अपमानित करने वाली भाषा नहीं बोलनी चाहिए। इससे दूसरों को कष्ट होता है। यदि आप ऐसा करेंगे, तो वे भी पलटकर आप के साथ वैसी ही भाषा बोलेंगे, जैसी आप उनके साथ बोलेंगे। फिर उससे आपको भी कष्ट होगा।" "अतः प्रमाणों और तर्क से परीक्षा करके सबका हितकारी न्यायपूर्वक मधुर सत्य ही बोलें। उसी से आपका और सबका सुख बढ़ेगा।"* *"जो भी विचार करें, योजना बनाएं, भाषा बोलें, और शारीरिक आचरण करें, वह सब ईश्वर को साक्षी मानकर करें। पूरी ईमानदारी से करें। तभी आप दूसरों के साथ ठीक व्यवहार कर पाएंगे और सुखमय जीवन जी पाएंगे।"* *"अन्यथा पूर्व जन्म के बुरे संस्कारों तथा वर्तमान समय के बुरे वातावरण के कारण आप बहुत सी गलतियां करेंगे। फिर आगे आपको उनका दंड भोगना पड़ेगा। अतः उस दंड से बचने के लिए बहुत सावधानी से जीवन जीएं।"* *"अपने मित्र भी इस प्रकार के बनाएं, जो शुद्ध विचार, शुद्ध वाणी और शुद्ध व्यवहार वाले हों। जो आपके हितचिंतक और आपके हितकारी, सभ्य तथा विनम्र हों।"* *"अतः आप, अन्य सब लोगों की प्रमाणों और तर्क से परीक्षा करें। जो दुष्ट स्वभाव के तथा स्वार्थी लोग हों, आपकी हानि करना चाहते हों, ऐसे लोगों को पहचान करके उन से दूर रहें। तभी आप दुखों से बच पाएंगे और सुख को प्राप्त कर पाएंगे, अन्यथा नहीं।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*
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