Anjuman Zeya E Akhtar
May 27, 2025 at 05:53 AM
जब मुरशिद-ए-करीम हुज़ूर क़ाइद-ए-मिल्लत #मुफ्ती_असजद_रज़ा_ख़ान_क़ादरी के साथ ये कहने का मौक़ा मिलता है कि “वासिते से #ताजुश्शरिअह के मैंने अपना हाथ #ग़ौस_ए_पाक💙 के दस्त ए पाक में दिया”
तब हम गुनहगारों की हालत ये होती है:
हैरत से ख़ुद को मैं देखता हूँ, फिर देखता हूँ मैं उनके करम को ✨
लाया कहाँ मुझ को मेरा मुक़द्दर अल्लाहु अकबर! अल्लाहु अकबर! 🙌💙
रज़ा ओ हामिद-ए-नूरी का गुलशन है बहारों पर
शगुफ्ता इस चमन में खैर से असजद रज़ा तुम हो
*“मौला सलामत रखें, हफीदहुल्लाह 🤲🌟”*
https://whatsapp.com/channel/0029VaA7lGb59Pwb3kkrbB2k
❤️
1