शिक्षक दखल
June 17, 2025 at 01:22 PM
सीखना किसी गुरुकुल, किसी किताब, या किसी अपने तक सीमित नहीं होता—जो वास्तव में सीखना चाहता है, वह दुश्मन की से भी ज्ञान बटोर लेता है। यही कारण है कि श्रीराम ने रावण जैसे अहंकारी और पराजित शत्रु से भी लक्ष्मण को ज्ञान लेने भेजा—क्योंकि जीतने के बाद भी सीखने की भूख ज़िंदा होनी चाहिए। यही सीख आज गुकेश जैसे युवा शतरंज खिलाड़ी से मिलती है, जिसने दुनिया के सबसे शक्तिशाली खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन को हराया।
यह वीडियो बताता है कि विरोधी सिर्फ हराने के लिए नहीं होते, कई बार वे तुम्हें वह सिखा जाते हैं जो कोई मित्र नहीं सिखा सकता। सीखने का सबसे बड़ा दुश्मन है ‘अहम’। और सीखने की सबसे बड़ी शक्ति है ‘स्वीकार’। जो सीखने के लिए तैयार है, वह किसी भी हालात में, किसी भी इंसान से, किसी भी परिस्थिति से कुछ न कुछ अपने जीवन में जोड़ता चला जाता है।
आज जब दुनिया 'मैं जानता हूं' के घमंड में डूबी है, ऐसे में यह सीखना और भी जरूरी हो जाता है कि जो सिखा सकता है, वह न अपना होता है न पराया—वह बस ‘एक अवसर’ होता है। गुकेश की जीत इस बात का प्रमाण है कि आज की पीढ़ी न सिर्फ सपने देख रही है, बल्कि उनसे सीख भी रही है, और उन्हें सच भी कर रही है। सीखने की यही आग हो तो कोई भी राह कठिन नहीं, कोई भी प्रतिद्वंदी दुश्मन नहीं, और कोई भी पराजय अंत नहीं। सीखना ज़िंदा रखता है, रुक जाना ही मौत है।
✍️ *प्रवीण त्रिवेदी*
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